Saturday, December 28, 2024

UGUMA-PRARTHNA (PQH-PRAYER)

असतो मा सदगमय
 तमसो मा ज्योतिर्गमय
 मृत्योर्मा अमृतमगमय 
 हम असत से सत की ओर चलें 
 हम अन्धकार से प्रकाश की ओर बढ़ें
 हम मृत्यु से अमरता को प्राप्त करें
 LET US MOVE FROM UNTRUTH TO TRUTH,
 LET US MOVE FROM DARKNESS TO LIGHT,
 LET US MOVE FROM MORTALITY TO LIFE,
 उत्पादकता धर्मो भवः
 गुणवत्ता जाति  भवः
 मानवता ध्येयो भवः 
 उत्पादकता हमारा कर्तव्य हो   
 गुणवत्ता हमारी पहचान हो
 मानवता हमारा लक्ष्य हो 
 PRODUCTIVITY BE OUR DUTY
 QUALITY BE OUR IDENTITY 
HUMANITY BE OUR DEITY 
यावत जीवेत आनंदम जीवेत 
उरिणम भूत्वा अमृतं पिवेत 
जब तक जिए आनंद से जियें 
उरिण  होकर अमृत पियें  
AS LONG WE LIVE, LIVE WITH BLISS 
BEING DEBTLESS NECTAR WE DRINK 
अपनी संस्था के हित में हो हित हमारा
 देश हित में हो संस्था का विकाश सारा
 OUR BENIFIT LIES IN THE BENEFIT OF OUR INSTITUTION 
OUR INSTITUTION MAY PROGRESS FOR THE BENIFIT OUR NATION
 हम भIरत के कर्मठ नागरिक /  कर्मचारी 
अपनी उत्पादकता , गुणवत्ता को रखें जारी
भारत को शिखर पर ले जाएँ 
विश्व में मानवता फैलाएं  
यह प्रतिज्ञा रहे सदा हमारी 
WE COMMITED PEAPLE /EMPLOYEES OF INDIA 
LET US ENHANCE OUR PRODUCTIVITY & QUALITY
 LET US SPREAD THROUGH OUT THE HUMANITY 
LET US PROMISE TO TAKE INDIA ON TOP
 LET THIS COURSE WE ALWAYS ADOPT.

AAPKA HAI KYA?

 आपका है क्या?

यह सौन्दर्य

तो मुझे क्यो सोहे?

यह यौवन

तो मुझे क्यो मोहे?

आपका है क्या ?

ये खिलखिलाते फूल

तो मुझे क्यो देते सुगन्ध

ये लहलहाते बाग 

तो  मुझे क्यो देते आनन्द?

आपका है क्या?

ये पिञ्जरे का पक्छी?

तो करता जब क्रन्दन

क्यों पिडीत होता मेरा अन्तर्मन?

आपका है क्या?

ये ऊंची अटात्लिकायें?

तो मुझे क्यों देती छाया?

ये घने पेड

तो मुझे क्यो देते हवा

क्यो बनते मेरी औशधि दवा?

आपका है क्या?

ये ब्च्चेऔर नारी

तो उनकॆ साथ आपके दुर्व्यवहार

मेरी निन्द क्यों भगाते

मेरे अन्दर आक्रोश क्यों जगाते?

आपका है क्या?

ये शरीर

तो जब यह टटरी पर श्मशान जाता

तो हमारा दिल दर्द से क्यो छटपटाता

वस्तुतह

आपका कुछ नही , आप भी कुछ नही+



























 


NAHI MAALOOM

 यह रास्ता किधर को जाता है?

पहाडी से सटे सटे गांव को

यह पहाडी के ऊपर क्या है?

भोले का मन्दिर

और नीचे?

अल्लाह का मन्दिर

ये दोनो मन्दिर ? यह कैसे?

हां साब, दोनो मन्दिर

दोनो जगह शान्ति और शकुन मिलता है

सबको मिलता है

हिन्दु को भी,मुसलमान को भी

गरीब को भी, अमीर को भी

तुम्हारा नाम ?

सञ्जय खान

हिन्दु हो या मुसलमान?

दोनो

गरीब हो या अमीर?

दोनो

तुम दोनो हो, यह कैसे?

यही तो मुझे नही मालूम!













DHOKHA

 झेल गया दर्द का झोका,होकर शोशित खाकर धोखा

गहराई से सोचा , मै भी दुङ्गा धोखा

दिया धोखा, अन्तर्मन कांपा

आकाश पाताल सब नापा

जिन्हे थग पाया

जिनका शोशन कर पाया

वे निकले 

हमसे भी ज्यादा ईमानदार

सहज, सीधे सादे बेगार

क्रिश शरीर

थे हमारे एक्दम करीब

यह देख, दर्द से दिल दुखने लगा

कन्ट शब्दहीन हो सुखने लगा

मन से बार बार पूछने लगा

तेरा अभिसट क्या है?

धोखा देना या धोखा खाना?

थगना या थगा जाना?

आदर्श तो है न थगना न थगाना

थगे जाने से सिर्फ़ मन ही मोट

थगने से चित्त पर चोट

जब हो जन,धन,शक्ति,शरीर मे सुख

अन्ह मे लिप्त,थगने से नही कोई दुख

पर जब होते असहाय,लाचार, वीमार

रुबरु होते थगने की चाल से

जिसे थगा होता उसका भी दीदार

पीडा जब अत्यन्त असह्य होती

ईश्वर,पराशक्ति की पूजा तब सह्य होती

धोखा खाने का दर्द सिर्फ़ एकबार

धोखा देने का दर्द बार - बार

धोखा खाकर मिलति है भयङ्कर शक्ति लडने की

जिजिविशा,उर्जा,शक्ति कुछ कर गुजरने की

धोखा देकर मिलता है उपहार डरने का

आत्मा के मरने का

अगर मुझे हो चुनना सिर्फ़ दो मे से एक

तो खाउङ्गा धोखा, यही कहता विवेक



































Friday, December 27, 2024

AANAND

 लहरें क्यो  उफान मारती हैं,बार बार चोट करती हैं

और तट से टकराती हैं

और फिर कयॊ वापस लौट जाती हैं

आवाज करती हैं या आवाज उटाती हैं

प्रेम मे पुकारती है,सङ्घर्श  करती है

या अनवरत आन्दोलन का आह्वान करती है

इस क्रम मे उर्जा खोती हैं या उर्जा पाती हैं

वाह, क्या खूब ,जीवन मे अद्भुत आनन्द लाती हैं

November 2019 after return from bagga beach Goa 


Katili Nyay

 अगर तुफान नही है तो इतनी उञ्ची लहर क्यों है

आखिर इस  हवा मे फ़ैली इतनी जहर क्यों है

प्रलय के लिये तो एक पल ही है प्रयाप्त

पर इन्हे मिला इतना लम्बा पहर क्यों है

अरे नादान, क्यो इन अन्धेर्गर्दों से ही पुछ्ते हो कि

इस अन्धेरी रात मे ही इन्हे दिखता सहर क्यों है

वाह,क्या खूब इन कातिलों से ही न्याय मांगने चले हो

और कहते हो ये लाते कयामत और टाते कहर क्यों हैं

२०२० Vasundhara 



Saturday, April 6, 2024

GULAAMI KI KHOJ

                                       गुलामी की खोज

कब बने गुलाम? कौन बना गुलाम?

सम्पुर्न  सन्सार विजेता

सिकन्दर और सेलुकस को करना पड़ा 

 सनातन से समझौता और सन्धि

छोड़ना पड़ा  हिँसा  और युद्ध

जो भारत मे थे मौजुद

चन्द्रगुप्त,चाणक्य,वीर और बुद्ध

यथुरास्त्र,ईशा,मुह्हम्मद भी आये

सनातन मे सदा के लिये समाये

पर जब गोरी और चङ्गेज आये

अपने साथ हिंसा ,लूट ,युद्ध ही  नही

गुलामी की जंजिर  लाये 

जयचन्दों  को वही भाये

धोखेबाज,झूठे ,फरेबियों 

मिर्जाफर और सिन्धिया

गान्धी,सुवाष ,नेहरु,पटेल

भगत,असफ़ाकउल्ला,जैसे वीरों  की 

बहार आई ,हमे आजादी दिलायी


2020