Saturday, May 17, 2025

होली रे

 होली रे 

पूरे बरस मै  परस को तरसा ,तू ना कुछ बोली बोली रे 

मधु मौसम मन हरसा हरसा ,बिन बोले मेरी हो ली रे, हो ली रे। 1 

चाहे बम मारो या भाला बरछा ,या बन्दूक से गोली रे 

फागुन की बलिहारी जाऊँ ,बिन पूछे तेरी हो ली रे ,हो ली रे।2 

गली गावं में चर्चा ,चर्चा आज ही भीगी अंगिया चोली रे 

मौन मौन ही रटत ये रसना ,आज साजन की हो ली रे ,हो ली रे। 3 

बिरह में तड़पत उमर  सब बिता ,अब उठी फागुन में डोली रे 

पीया घर हंसी, पीहर सब रोअत ,किसकी थी किसकी हो ली रे हो ली रे।4 

मोर,काग,पीक कुहुकत, कुहुकत,रखो न मेरी खाली खोली रे 

मधुमास मन तड़पत तड़पत ,भर दो भर दो ,आज तेरी हो ली रे हो ली रे। 5 

नाला, नदिया,गोरिया ,संवरिया,पेड़ पत्ता सब डोली रे 

भंवरा फूल डोलत बगिया,बगिया  

आज प्रेम बीज बो ली रे ,बो ली रे

आज बस तेरी हो ली रे ,हो ली रे। 6 

कैसे गाऊं बिरह का गाना ,बिन मिले साजन आज मत जाना 

भर दे, भर दे खाली झोली रे,

आज तो तेरी हो ली रे हो ली रे।7 

मैं तो रूठी घर से निकली ,सब कहें बौरी पगली, पगली

भई बिबस जब झांझ मजीरा लिए आई सखियन की टोली रे 

ये बौरी अब तेरी हो ली रे हो ली रे।8 

सिर्फ दोष नहीं मेरा अपना ,तुमने ही मुझे छेड़ा सजना

कि  बिरही बन फागुन में रहना  

पर अब तक तेरी पोल न खोली रे 

आज तो तेरी हो ली रे ,हो ली रे। 9 

जनम जनम की लगी जो करिखा ,रगड़ रगड़ तूने तत मेरा परिखा ,

लागि जो दगिया कटु तेरी बतिया रतिया धो ली रे ,धो ली रे 

आज साजन तेरी हो ली रे हो ली रे। 10 

मार्च 2006 झाँसी   

  

   

  

 











 




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