आपका है क्या?
यह सौन्दर्य
तो मुझे क्यो सोहे?
यह यौवन
तो मुझे क्यो मोहे?
आपका है क्या ?
ये खिलखिलाते फूल
तो मुझे क्यो देते सुगन्ध
ये लहलहाते बाग
तो मुझे क्यो देते आनन्द?
आपका है क्या?
ये पिञ्जरे का पक्छी?
तो करता जब क्रन्दन
क्यों पिडीत होता मेरा अन्तर्मन?
आपका है क्या?
ये ऊंची अटात्लिकायें?
तो मुझे क्यों देती छाया?
ये घने पेड
तो मुझे क्यो देते हवा
क्यो बनते मेरी औशधि दवा?
आपका है क्या?
ये ब्च्चेऔर नारी
तो उनकॆ साथ आपके दुर्व्यवहार
मेरी निन्द क्यों भगाते
मेरे अन्दर आक्रोश क्यों जगाते?
आपका है क्या?
ये शरीर
तो जब यह टटरी पर श्मशान जाता
तो हमारा दिल दर्द से क्यो छटपटाता
वस्तुतह
आपका कुछ नही , आप भी कुछ नही+
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