Friday, May 9, 2025

आज का बाजार

 वसुधेव कुटुम्बकम मत कहो,कहो विश्व व्यापार

यू एनओ को मारो लात करो वियतनाम,अफगान,इराक पर वार

  श्वास लो  धुआ पियो कोक ,पेप्सी बीयर बार

करो विचारों इतिहासों का अंत 

सभ्यताओं पर निरंतर वार

पढ़ो बाजार, पढ़ाओ बाजार, बढ़ो  बाजार, बढ़ाओ  बाजार

जय   हो, जय हो, जय हो,बाजार ,जय हो बाजार 

प्रजातंत्र मानवता को बचातेअणुबम,नारे,तलवार

झूठ,फरेब,लोभ ,भय ,सेक्स विज्ञापनों  की भरमार

अपराधी ,हत्यारे खुलेआम घूमे संत सभी बंद कारागार

हाथ में लैपटॉप कान में सेल फोन चमचमाती मोटर कार

चमड़ा मोटा दिमाग छोटा हृदयहुआ  छलनीऔर तारतार 

धन्य हो बाजार,धन्य हो बाजार,धन्य हो बाजार

अब मंदिर, न मस्जिद न गिरिजा, न गुरुद्वार 

न जैन, न पारसी ,न यहूदी, न बौद्ध बिहार 

न पंडित, न मुल्ला, न पादरी, न जत्थेदार 

न भाई बहन, न माई बाप ,न दोस्त यार 

सारे रिश्ते नातो  में पसर गया बाजार 

भाड़े के पति पत्नी ही भरा पूरा परिवार 

अब रहा गाँव न पड़ोस न घर न द्वार 

उदय हो बाजार,सुहृदय हो बाजार,अभ्युदय हो बाजार 

सड़क बनाते सतनु मर गए घड़ा बनाते घुरा कुम्हार

मॉल में दब गए दुधन  ददू , जूता बनाते चतुरी चमार 

मुसहर टोली, मनाई होली पकड़े जब आतंकी चूहे चार 

प्लास्टिक खा के गाय मर गयी, कूड़ा बीनते कनुआ कहार 

पेस्टिसाइड पीके रेड्डी राणा मर गए ,मछली पकड़ते पुथ्रन  पेरियार 

भारत भवानी की भ्रूण में हत्या ,पार्लियामेंट में जुत्तम पैजार 

पस्त हो बाजार, त्रस्त हो बाजार, ग्रस्त हो बाजार

पापा को मिला जबरन वीआरएस 

चाचा  की फैक्ट्री बंद आज का समाचार

दादी मेरी खाट पड़ी बाबा बूढ़े बेहद बीमार 

बहन बिकी बाज़ार में जवान बेटा बेरोजगार 

मनुआ मरा दवा बिना मुनिया मरी बिन आहार

हय  हो बाजार ,छय  हो बाजार,लय  हो बाजार

जंगल की आग  की तरह पछेया हवा में बढ़ रहा बाज़ार 

गाय, भेड़, बकरी, खरगोश 

तीसरी दुनिया के सब जानवर लाचार 

पुरे जंगल में बचा एक सेर रहा दहाड़ 

पुरवइया बयार की है सबको इन्तजार 

ध्वस्त हो बाजार , नष्ट हो बाजार , विनष्ट हो बाजार 















 












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