पत्थर को भी जब पहनाते ताज
होते वे पूज्य ,सिंहासन पर विराजमान
पण्डे,पुरोहित ,नगाड़े ,ढोल,झाल
पैसो की बरसात, भक्तो का धमाल
मिलाने का समय तय
शांति की जगह हिंसा और भय ही भय
सोने चांदी के चौखट किवाड़
जो पहनाया ताज
वह देख रहा
आस्था श्रद्धा भक्ति प्रेम विश्वास
का मायावी खिलवाड़
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