Saturday, May 17, 2025

उनके गुमान

 उनके गुमान 

हुजूर हमारी गली से बिन बताये 

खामोश गुजर जाते हैं 

कमाल है,पता नहीं 

कैसे हम जान जाते हैं? 1 

दरिया की गहराई में एकांत 

 वे  मधुर तान भरते हैं 

सतह पर स्वर भला 

कैसे हम पहचान जाते हैं ?  2 

जिनके आने की आहट से 

दिल में उठती थी मोहक हिलोरें 

उनके अहसास अब 

क्यों मन में तूफान लाते हैं ? 3 

जब हम थे अजनवी 

रोज लाते थे वे प्यार के सन्देश 

अब उनकी याद, क्यों 

मौत का फरमान लाते हैं? 4 

जिनकी धड़कनो से चलती थी 

कभी अपनी एक एक सांसे 

पता नहीं क्यों अब वे नहीं 

उनके अरमान आते हैं ? 5 

किसे कहते हैं प्यार,जज्बात,मुहब्बत 

अभी देखना है बाकी 

कि वे खुद आते हैं 

या उनके अरमान आते हैं?  6

दिसंबर 2005 


















No comments: