उनके गुमान
हुजूर हमारी गली से बिन बताये
खामोश गुजर जाते हैं
कमाल है,पता नहीं
कैसे हम जान जाते हैं? 1
दरिया की गहराई में एकांत
वे मधुर तान भरते हैं
सतह पर स्वर भला
कैसे हम पहचान जाते हैं ? 2
जिनके आने की आहट से
दिल में उठती थी मोहक हिलोरें
उनके अहसास अब
क्यों मन में तूफान लाते हैं ? 3
जब हम थे अजनवी
रोज लाते थे वे प्यार के सन्देश
अब उनकी याद, क्यों
मौत का फरमान लाते हैं? 4
जिनकी धड़कनो से चलती थी
कभी अपनी एक एक सांसे
पता नहीं क्यों अब वे नहीं
उनके अरमान आते हैं ? 5
किसे कहते हैं प्यार,जज्बात,मुहब्बत
अभी देखना है बाकी
कि वे खुद आते हैं
या उनके अरमान आते हैं? 6
दिसंबर 2005
No comments:
Post a Comment