Friday, May 23, 2025

श्रमिक (LABOUR)

                                               श्रमिक 

विश्व सभ्यता के वास्तविक निर्माता ,मानवता के भाग्य विधाता 

श्रमिक, तुम्हे नमस्कार ,सत बार , सहश्र बार, बार- बार ,

हर बार तुम्हारी चरण बन्दना करता मै हे ! कामगार !1 

जो ईमानदार है, श्रम करता है , जो झूठा ,फरेबी वो भ्रम रचता है 

श्रमिक हवश से दूर रहता है ,संतोष धन से भरपूर रहता है। 

करुणा से प्रेरित हो,  करता है कारबार 

तुम्हारी चरण  . . . . 2 

श्रम से ही कुदाल ,फावड़े ,हल,मज़दूर बनाते 

किसानो के संग मिल होली, बिरहा ,कजरी गाते 

पसीने बहाते दिन में ,रात में  गहरी नींद पाते 

न छल,छद्म,न झूठ ,फरेब ,न करते वे घाते 

कुदरत से सिख अपने विवेक विश्वास को करते वे धारदार 

तुम्हारी चरण वंदना ,,,,,,,,,,,,3 

श्रम स्वधर्म है ,श्रम स्वाभाव है ,तन, मन ,जीवन में यही भाव है 

सेवा के सिवा कोई नहीं चाव है 

पाने को सर्वस्व ,खोने को कुछ नहीं दाव है,

श्रमिक, तुम स्वस्थ,सुन्दर,सुडौल,और शानदार 

जीवित और जानदार 

तुम्हारी चरण वन्दना करता मै हे ! कामगार 

/सात बार शहस्र बार ,बार, बार ,हर बार 

श्रमिक तुम्हे नमस्कार।  4 


रामेश्वर दुबे ,
25  मई 2016 ,( आकाशवाणी ,लखनऊ के श्रमिक जगत कार्यक्रम में प्रसारित) 











 

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