पेड़ का प्रश्न
मैंने पेड़ से पूछा
तुम क्यों मेरे जन्म के पूर्व से ही खड़े हो ?
क्यों नहीं टूटते ,गिरते ,सड़ते
दूसरे पेड़ो से लड़ते ?
कितनी ही प्रचंड आंधियां ,भयंकर तूफ़ान एवं बाढ़ आये
वह रहा चुपचाप खड़ा
मेरे सवाल का जवाब दिया
और मुझसे ही प्रश्न जड़ा
बसंत में हम सभी हंसते हैं ,पतझड़ में झड़ते हैं
एकसाथ सभी खिलते हैं ,फूलते हैं ,फलते हैं
आंधी में साथ ही हिलते हैं
इसलिए कि
पतझड़ में हंसाने ,बसंत में रुलाने
आंधी में झूठे धीरज बंधाने
और विकाश की सही दिशा दिखाने
हमारा कोई नेता नहीं होता
तुम सदियों से अपना नेता क्यों चुनते हो ?
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