Thursday, February 27, 2025

SEEKH LEN

                                                                         सीख लें

क्यों न हम संघर्ष करना सीख लें ,समय(उम्र)जब संघर्ष में ही बितना है 

तुम तो अपने रास्ते पर ध्यान दो ,चीखने दो उनको जिनको चीखना है  .1 

 संघर्ष से ही स्वतंत्रता का खुलता है रास्ता ,सीखने दो उनको जिनको सीखना है 

तुम तो आवाज़ उठाते रहो बेहिचक,सिलने दो उनको जिनको वाणी सीलना है। 2 

क्यों न हम सयंम से रह स्वस्थ रहना सीख लें यदि जीवन में कुछ न कुछ सीखना है

तुम तो अपने उदर पर ध्यान दो ,लीलने दो उनको जिनको लीलना है  . 3 

क्यों न  हम हंसें और बिखेरें गंध भी ,यदि पुष्प बनकर ही चमन में खिलना है,

तुम भविष्य  का इतिहास गढ़ते  चलो ,लिखने दो उनको जिनको लिखना है। 4 

क्यों न हम उठें , जागें, श्रेष्ठ से मिलें ,जब किसी न किसी से मिलना है 

तुम तो लाली पूरब की देखने निकलो,मीचने दो उनको जिनको आँखें मीचना है। 5 

क्यों न हम लीक से हटकर चलें अगर जिंदगी से कुछ सीखना है 

तुम तो संघर्ष का आनंद लेते चलो, पीटने दो उनको जिनको लकीर पीटना है। ६ 

क्यों न हम वही दिखें जो हैं यदि हमको कुछ दिखना है 

तुम तो खुले बदन धूप सेंकने निकलो  भीगने दो उनको जिनको भीगना है। ७ 

क्यों न हम प्रियतम को खींच लगा ले हृदय से जब किसी न किसी को पास खींचना है ,

मुठ्ठी बंद आए हैं, खुले  हाथ जाएंगे,  भीचने दो उनको जिनको मुठ्ठी भीचना है। ८ 


२१ अक्टूबर २०१० ,  गौहाटी रेलवे स्टेशन 







 



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