सीख लो
दिन को भी रात कहना सीख लो,
गर्मी को बरसात कहना सीख लो।
वक्त जो टेढ़ा पड़े तो बेहिचक
गधे को भी बाप कहना सीख लो।
बॉस अगर चाहे तो आँखें मीचकर
दाल को भी भात कहना सीख लो।
नौकरी चमचागिरी का नाम है
इस कला के साथ रहना सीख लो।
कौड़ियों के भाव बिकते है वसूल
तुम हवा के साथ रहना सीख लो।
है सभी रोगों का नुस्खा 'जी हजूर,यस सर '
बस यही एक बात कहना सीख लो.
ब्रम्हजीत गौतम
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