को अहं - सो अहं
धन हार गया
तन डार गया
मन मार गया , जब देखा तुझको।
ढूंढा तुमको कण कण में
पाया तुमको निज दर्पण में
भाया तुमको मैं अर्पण में
दिल का शूल गया
सबकुछ भूल गया
रस बन घूल गया ,जब देखा तुझको।
सोने पर तुम आँखों में
जगने पर तुम काँखो में
सपने में तुम पाँखों में
मन महक गया
तन चहक गया
दिल बहक गया , जब देखा तुझको।
*'मरलायन' में तुम मिलती हो
फूलों सी नित खिलती हो
*'रोज़ाना' तुम मिलती हो
तन सिमट गया
मन लिपट गया
अंग चिपट गया ,जब देखा तुझको।
ढूंढा तुमको ,पाया निजको
ढूंढा निज को पाया तुमको
मैं गाँऊ, तुम ठुमको, ठुमको
सब हूब गया
मन ऊब गया
तुझमे ही डूब गया , जब देखा तुझको।
सत्य तुम्ही, सुन्दर तुम हो ,
शिव तुम्ही, अक्छुण तुम हो
तुम ही,तुम ही, तुम ही,तुम हो
सब वही रहा
रस खूब बहा
बस मैं नहीं रहा , जब देखा तुझको।
अधरों पर मुस्कान भरी हो
आँखों में अरमान भरी हो
रसना में रसपान भरी हो
तुमने पूछा -कोअहं ?कोअहं ?
झट बोल उठा-सोअहं ,सोअहं ,जब देखा तुझको।
*मरलायन--मरलायन पार्क -सिंगापुर का प्रतिष्ठित पार्क
*रोज़ाना -रोज़ाना हेपवर्थ -सिंगापूर होटल की सेल्स मैनेजर
*pohong --चिनी मूल की ,सिंगापुर प्रोडक्टिविटी बोर्ड की मैनेजर एंड प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर
२५अप्रिल 1999 - एस्पलेनैड पार्क ,मरलायन पार्क के पास ,सिंगापुर
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