Friday, January 3, 2025

BAHELIYA AUR VIGYANI (HUNTER AND SCIENTIST)

जब बहेलिये ने देखा पक्छियों को गगन में भरते उन्मुक्त  उड़ाने  

उसका दिमाग सकुचाया,मन कचोटा और मन लगा तड़फड़ाने 

झुरमुट में,झाडी में,जंगल में, पेड़ों पर, घोसलों में 

जब देखा उन्हें गाते ,मिलकर चहचहाते 

उसका दानवी दिल दिमाग लगा द्वेष से झनझनाने 

मैं  मनुष्य योनि में लेकर जन्म भी 

अपना पेट न भर सका 

स्वाधीन न हो सका 

और ये छोटे छोटे परिंदे हँसते हैं ,गाते हैं 

उन्मुक्त हो फुर से आकाश में उड़ जाते हैं 

नन्हे निरीह पक्छियों की स्वाधीनता न सह सका 

अपना पेट न भर सका 

किये गुरदेल ,तमंचे, बन्दुक,बम का आविष्कार 

लगे करने मासूम पक्छियों का रोज शिकार 

उसका संकुचित मन ,ईर्ष्यालु दिल ,जलते अरमान 

न सह सका पक्छियों  का कलरव ,सहगान 

बिछाए जाल,डाले दाने ,

लगे नित नव पक्छियों को फसाने 

आदि काल से बहेलिया फंसा रहा ,जाल बिछा रहा 

फिर भी न भरा उसका पेट,न दिल, न मन 

परन्तु ये परिंदे गा  रहे,हंस रहे,

उड़ रहे उन्मुक्त हो गगन। 

जब विज्ञानी ने देखा पक्छियों 

को गगन में भरते उन्मुक्त उड़ाने 

दिमाग फड़फड़ाया ,उत्पन्न हुई जिज्ञाषा लगा दिल तड़फड़ाने 

जब देखा पक्छियों को उड़ते उतुंग आकाश 

हाथों को डैनो में बदलने का लगा करने प्रयाश 

लगाए पंख बनाये गुब्बारा 

फिर ग्लाइडर का लिए सहारा 

किये आविष्कार ,लगे उड़ने वायुयान में

हो गए सफल जेट, रॉकेट अभियान में 

विज्ञानी के आविष्कार से सभी चिहुंक गए 

धरती से आकाश क्या चाँद पर पहुंच गए 

अब अन्य ग्रहों  की बारी है

अभी भी होड़ जारी है 

वाह रे विज्ञानी,

पक्छियों को देख बनाये मानव को देवदूत 

स्वर्ग में विचरते देख होते सभी  अभिभूत 

जब विज्ञानी ने सुना 

पक्छियों का हर्षगान कलरव 

गूंज गया उनका स्वर अभिनव 

वसंत में कोयल की कूक 

दहकाती दिल में विरह की हूक 

पी पी पपीहा की आवाज 

प्रेम में मदमस्त सब साज 

कबुतर-कबुतरी का गुटुर् गूँ -गुटुर गूँ 

तीतर की ट्यूं , मोर की पियूं - पियूं 

सबको सूना ,मन में धूना 

तान, ले संगीत में सबको बूना 

खुद उतार लिए स्वर पक्छियों परींदो  के 

किये आविष्कार अनेक वाद यंत्रों के 

विना इन पक्छियों के भी हम 

सुनते इनके मधुर स्वर सह  गान  

आनंद में विभोर करते कलगान 

वाह रे संगीतज्ञ वह रे विज्ञानी 

शहर में भी जंगल को लाने के स्वाभिमानी 



अप्रैल 1997 दिल्ली सुबह में सपने से जागकर 

अप्रैल 

 














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