कहानी में कविता रामेश्वर दुबे
8 दिसम्बर ,2016
नोट बंदी के ठीक 3हपते बाद
बचपन से ही सुनते आए हैं एक कहानी
परदादा से दादा ,दादा से पिता (नहीं अब तो पापा )
अब मैं सुनाता आपको वही जबानी।
एक था राजा बिलकुल ही नंगा
अंग, प्रत्यंग एकदम बिद्रूप
कसाई, क्रूर ,काला,कपटी,कोरा- कुरुप
देखकर सारे "सयाने विद्वान " हुए मुग्ध
देख राजा का अद्भुत रूप
भूल गए सुध और बुध।
वाह!क्या वस्त्र है ,सौंदर्य है,साज है ,
ना देखा ऐसा राजा न देखा ऐसा राज है.
राजा आज तो खूब सजा है ,
वस्त्र उसपर खूब फबा है ,
इसीलिए तो देश अब पुनः विश्व गुरु बन रहा
और विदेश में नाम बहुत ऊपर चढ़ रहा।
एक निर्दोष बालक राजा को देखा
और गैलेलिओ की तरह बुदबुदाया-
अरे!राजा तो वस्त्रहीन,निर्मम नंगा है.
राष्ट्र भक्त,धर्म भक्त ,अंध भक्त उसे हड़काये
तू तो बालक है,क्यों नाहक लेता पंगा है.
पोस्टर पढ़,धार्मिक विद्वानों और राजा की बात सुन ,
आँखिन देखि दूर कर,नाक तो कटेगी ही,साँस भी बंद हो जायेगी
अन्यथा आँख अपनी बंद कर।
क्या हुआ बालक का किसी ने नहीं बताया -
न परदादा ने ,न दादा ने,न पापा ने
और मुझे भी नहीं मालूम ,आपको मालूम है क्या?
पर एक बात मालूम है ,
आज इस देश में एक भी बच्चा नहीं बचा है ,
हाँ सच है ,एक भी निर्दोष बच्चा नहीं बचा है ,
सिर्फ राजा सजा है ,सिर्फ राजा सजा है ,
न कविता बची है न कबीर बचा है ,
न विज्ञान बचा है न ईमान बचा है ,
सिर्फ भक्त बचे हैं और राजा सजा है ,
प्रजा में गर्म खून न रईसों में पानी बचा है
सिर्फ सजा है ,सिर्फ राजा सजा है।
8 दिसम्बर ,2016
नोट बंदी के ठीक 3हपते बाद
बचपन से ही सुनते आए हैं एक कहानी
परदादा से दादा ,दादा से पिता (नहीं अब तो पापा )
अब मैं सुनाता आपको वही जबानी।
एक था राजा बिलकुल ही नंगा
अंग, प्रत्यंग एकदम बिद्रूप
कसाई, क्रूर ,काला,कपटी,कोरा- कुरुप
देखकर सारे "सयाने विद्वान " हुए मुग्ध
देख राजा का अद्भुत रूप
भूल गए सुध और बुध।
वाह!क्या वस्त्र है ,सौंदर्य है,साज है ,
ना देखा ऐसा राजा न देखा ऐसा राज है.
राजा आज तो खूब सजा है ,
वस्त्र उसपर खूब फबा है ,
इसीलिए तो देश अब पुनः विश्व गुरु बन रहा
और विदेश में नाम बहुत ऊपर चढ़ रहा।
एक निर्दोष बालक राजा को देखा
और गैलेलिओ की तरह बुदबुदाया-
अरे!राजा तो वस्त्रहीन,निर्मम नंगा है.
राष्ट्र भक्त,धर्म भक्त ,अंध भक्त उसे हड़काये
तू तो बालक है,क्यों नाहक लेता पंगा है.
पोस्टर पढ़,धार्मिक विद्वानों और राजा की बात सुन ,
आँखिन देखि दूर कर,नाक तो कटेगी ही,साँस भी बंद हो जायेगी
अन्यथा आँख अपनी बंद कर।
क्या हुआ बालक का किसी ने नहीं बताया -
न परदादा ने ,न दादा ने,न पापा ने
और मुझे भी नहीं मालूम ,आपको मालूम है क्या?
पर एक बात मालूम है ,
आज इस देश में एक भी बच्चा नहीं बचा है ,
हाँ सच है ,एक भी निर्दोष बच्चा नहीं बचा है ,
सिर्फ राजा सजा है ,सिर्फ राजा सजा है ,
न कविता बची है न कबीर बचा है ,
न विज्ञान बचा है न ईमान बचा है ,
सिर्फ भक्त बचे हैं और राजा सजा है ,
प्रजा में गर्म खून न रईसों में पानी बचा है
सिर्फ सजा है ,सिर्फ राजा सजा है।
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