Sunday, September 20, 2020

किस काम का?

 कभी भी दया दर्शाते नहीं, इंसान हैं? किस काम का?

बिलबिला रहे भूख से बच्चे,सामान है? किस काम का?

सपने कभी तो पूरे हुए नहीं, अरमान है?किस काम का?

तीर रखकर भी चलाते नहीं,कमान है? किस काम का ?

दुश्मन चढ़ा है छातीपर, इलाके भर में पहचान है? किस काम का?

उठाते नहीं आवाज कभी, ज़बान है? किस काम का  ?

रामेश्वर दुबे,२१/९/२०२०

No comments: