Friday, September 18, 2020

बांया-दांया

 जब मैंने बांया पैर उठाया,

वह बहुत जोर से धमकाया

है भी तुम्हारे पास बांया पैर?

उठाओ मत, न रहेगी खैर!

मैंने पूछा - क्या आप दक्षिण पंथी हैं

सिर्फ सुनते हैं देखते कुछ नहीं।

जब मेरा दांया पैर उठा

वह हमसे अचानक रुठा

बोला- आप दांये पैर से क्यों चलते,

यह पैर तो लोगों को रहा है मसलते

जोर से चिल्लाया और नारा लगाया

होगे नेस्तनाबूद क्रांति का विहान जो आया।

मैंने पूछा क्या आप वामपंथी हैं?

सिर्फ देखते हैं, सुनते कुछ नहीं।

मैंने दोनों को बुलाया

विस्तार से समझाया

मैं सदियों सदियों से दोनों पैरों से चलता हूं

कभी बांया तो कभी दांया पैर आगे करता हूं।



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