अनुभुति
क्या हो जब
मञ्जिल ही मार्ग बन जाए,
फिर क्यो और कहा जाए?
या फिर
जब मार्ग ही मञ्जिल बन जाए
तो जहा भी जाए उसे ही पाए
प्रेम ही मार्ग प्रेम ही मञ्जिल
सुख मे दुख मे आनन्द पाए
जन्मते बाल राम, जवानी मे सिया राम
मिलते राम राम, मरते सत्य राम
अहा, राम के रसते राम को पाए
जीवन भर आनन्द मनाए.
२२जनवरी२०२४ प्रानप्रतिस्था के अवसर पर
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